:
Breaking News

Samastipur News: पहले हमला, फिर चाकूबाजी, फिर गोलीकांड; तीन FIR के बाद भी आरोपी आज़ाद, रोसड़ा पुलिस पर उठे सवाल

top-news
https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Alam Ki Khabar: Samastipur News के तहत रोसड़ा के पत्रकार मणिकांत राय के परिवार पर लगातार तीन जानलेवा हमलों के बाद भी गिरफ्तारी नहीं होने का आरोप। पीड़ित परिवार ने रोसड़ा थाना पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए।

समस्तीपुर, 5 अगस्त। आलम की खबर: समस्तीपुर जिले के रोसड़ा थाना क्षेत्र के शाहपुर गांव निवासी पत्रकार मणिकांत राय के परिवार पर लगातार तीन जानलेवा हमले होने और तीन अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद अब तक किसी भी मामले में प्रभावी पुलिस कार्रवाई नहीं होने का आरोप सामने आया है। पीड़ित परिवार का कहना है कि दो महीने के भीतर एक के बाद एक तीन गंभीर घटनाएं हुईं, लेकिन मुख्य आरोपी अब भी खुलेआम घूम रहे हैं। इससे न केवल परिवार में भय का माहौल है, बल्कि पत्रकारों के बीच भी कानून-व्यवस्था और सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।

पीड़ित पत्रकार मणिकांत राय के अनुसार पहली घटना 21 मई 2026 को हुई, जब उनके पुत्र सम्राट सौरभ पर जानलेवा हमला किया गया। इस मामले में रोसड़ा थाना कांड संख्या 184/26 दर्ज किया गया। परिवार का आरोप है कि यदि इसी मामले में समय पर कठोर कार्रवाई होती तो आगे की घटनाओं को रोका जा सकता था।

पहली घटना के महज तीन दिन बाद, 24 मई 2026 को उनके दूसरे पुत्र सम्राट सचिन पर चाकू से हमला कर गंभीर रूप से घायल कर दिया गया। इस संबंध में रोसड़ा थाना कांड संख्या 205/2026 दर्ज हुआ। लगातार दूसरी वारदात के बाद भी आरोपियों के विरुद्ध निर्णायक कार्रवाई नहीं होने का आरोप परिवार लगा रहा है।

इसके बाद 22 जुलाई 2026 को अपराधियों ने एक बार फिर सम्राट सौरभ को निशाना बनाया और गोली मार दी। गोली उनके हाथ में लगी और उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस मामले में रोसड़ा थाना कांड संख्या 294/26 दर्ज है। घटना के लगभग 15 दिन बाद भी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने का आरोप लगाया गया है।

मणिकांत राय का कहना है कि तीन-तीन आपराधिक मामलों में प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद अब तक किसी भी मामले में मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। उनका आरोप है कि उन्होंने कई बार पुलिस अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाई। उनका यह भी दावा है कि अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (DSP) के समक्ष भी मामला उठाया गया और कार्रवाई के निर्देश दिए गए, लेकिन थाना स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।

पीड़ित परिवार का कहना है कि लगातार हो रही घटनाओं के बाद भी उन्हें सुरक्षा का भरोसा नहीं मिल सका। उनका आरोप है कि आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं, जिससे परिवार लगातार भय और असुरक्षा के माहौल में जी रहा है। परिवार का कहना है कि यदि समय रहते पुलिस प्रभावी कार्रवाई करती, तो तीसरी घटना जैसी गंभीर वारदात टाली जा सकती थी।

इस मामले को लेकर स्थानीय पत्रकारों में भी नाराजगी देखी जा रही है। पत्रकारों का कहना है कि यदि एक पत्रकार का परिवार ही सुरक्षित नहीं रहेगा तो लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्न खड़े होंगे। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच, सभी आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी तथा पीड़ित परिवार को सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है।

रोसड़ा थाना पुलिस का पक्ष: इस संबंध में रोसड़ा थाना पुलिस का विस्तृत पक्ष प्राप्त नहीं हो सका। पुलिस की प्रतिक्रिया प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

तीन हमले, तीन FIR और फिर भी न्याय अधूरा—आखिर जवाबदेह कौन?

समस्तीपुर के रोसड़ा थाना क्षेत्र में पत्रकार मणिकांत राय के परिवार पर लगातार तीन गंभीर हमलों का मामला केवल एक परिवार की पीड़ा तक सीमित नहीं है। यदि किसी परिवार पर बार-बार हमले होते हैं, तीन अलग-अलग मामलों में प्राथमिकी दर्ज होती है और पीड़ित पक्ष यह आरोप लगाता है कि अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, तो यह कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।

पुलिस की जिम्मेदारी केवल प्राथमिकी दर्ज करना नहीं, बल्कि अपराधियों तक पहुंचकर उन्हें कानून के कटघरे में खड़ा करना भी है। यदि किसी मामले में जांच लंबी खिंचती है या गिरफ्तारी नहीं होती, तो स्वाभाविक रूप से पीड़ित परिवार के मन में असुरक्षा और आम लोगों के मन में सवाल पैदा होते हैं। ऐसी स्थिति में संबंधित पुलिस अधिकारियों का दायित्व और बढ़ जाता है कि वे जांच की प्रगति सार्वजनिक करें और लोगों का विश्वास बनाए रखें।

पत्रकार लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माने जाते हैं। यदि किसी पत्रकार का परिवार खुद को असुरक्षित महसूस करता है, तो यह केवल एक व्यक्ति का नहीं बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़े भरोसे का भी प्रश्न बन जाता है। ऐसे मामलों में पुलिस और प्रशासन को संवेदनशीलता, निष्पक्षता और तत्परता के साथ कार्रवाई करनी चाहिए।

अब आवश्यकता इस बात की है कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और समयबद्ध समीक्षा हो। यदि जांच में कोई कमी या लापरवाही हुई है तो उसकी जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। साथ ही, यदि आरोपी अब तक गिरफ्तार नहीं हुए हैं तो उन्हें जल्द कानून के दायरे में लाया जाए। न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि होता हुआ दिखाई भी देना चाहिए। यही कानून के शासन की सबसे बड़ी पहचान है।

https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *